नितिन नबीन के गढ़ में कमल मुरझाया, दतिया में कांग्रेस का परचम”: उपचुनावों में भाजपा की दुर्गति पर डॉ. शिवकुमार डहरिया का करारा प्रहार।

 बिहार और मध्य प्रदेश के उपचुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी को मिली करारी शिकस्त पर छत्तीसगढ़ के पूर्व कैबिनेट मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. शिवकुमार डहरिया ने तीखा हमला बोला है।

नितिन नबीन के गढ़ में कमल मुरझाया, दतिया में कांग्रेस का परचम”: उपचुनावों में भाजपा की दुर्गति पर डॉ. शिवकुमार डहरिया का करारा प्रहार।

रायपुर  बिहार और मध्य प्रदेश के उपचुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी को मिली करारी शिकस्त पर छत्तीसगढ़ के पूर्व कैबिनेट मंत्री व वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. शिवकुमार डहरिया ने तीखा हमला बोला है। डॉ. डहरिया ने परिणामों को भाजपा के "राजनीतिक पतन की शुरुआत" करार देते हुए कहा कि देश की जनता अब भाजपा के छलावे, जुमलेबाजी और प्रशासनिक कुशासन से पूरी तरह ऊब चुकी है।

बांकीपुर (बिहार) उपचुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. डहरिया ने कहा कि बांकीपुर की हार महज एक उपचुनाव की हार नहीं है, बल्कि यह भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर जनता का अविश्वास प्रस्ताव है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के अपने गढ़ और स्वयं के बूथ पर भाजपा उम्मीदवार नीरज सिन्हा की लगभग 20 हजार वोटों (19,324 वोट) के भारी अंतर से शर्मनाक हार यह साबित करती है कि भाजपा का आधार खिसक चुका है। जनसुराज के प्रशांत किशोर को मिले 64,151 वोट और भाजपा की दुर्गति यह बताने के लिए काफी है कि जनता ने भाजपा के अहंकार को उखाड़ फेंका है।

"दतिया में जनता ने भाजपा के षड्यंत्र का दिया मुंहतोड़ जवाब"

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह की 6,056 वोटों से हुई ऐतिहासिक जीत का स्वागत करते हुए डॉ. डहरिया ने कहा कि "कांग्रेस के जुझारू नेता राजेंद्र भारती को एक साजिश के तहत अयोग्य ठहराकर उपचुनाव थोपा गया था। 2023 में राज्य के तत्कालीन गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को हराने वाली दतिया की जनता ने इस बार भी भाजपा के षड्यंत्र को खारिज कर दिया। हार के डर से भाजपा ने इस बार नरोत्तम मिश्रा को मैदान में उतारने की हिम्मत तक नहीं दिखाई और नया चेहरा आशुतोष तिवारी भी मुंह के बल गिरा। दतिया में सत्य और न्याय की जीत हुई है।"

"डबल इंजन नहीं, अब भाजपा का डिब्बा गोल" 

डॉ. डहरिया ने जोर देकर कहा कि इन उपचुनावों के परिणाम यह स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि देश में हवा का रुख बदल चुका है। महंगाई, बेरोजगारी, और विपक्ष को केंद्रीय एजेंसियों से दबाने की भाजपाई नीति का अंत अब तय है। जनता ने साफ कर दिया है कि सत्ता के अहंकार और प्रचार तंत्र के बल पर जनमत को हमेशा के लिए नहीं छाला जा सकता।