शराब दुकान के सुपरवाइजर-सैल्समेन ही निकले कोचिये, तो आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
सरकारी शराब दुकान से 160 पाव देशी मसाला शराब लेकर कथित अवैध बिक्री के लिए जा रहे सात लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है।
आरंग (वीरेंद्र वर्मा)। सरकारी शराब दुकान से 160 पाव देशी मसाला शराब लेकर कथित अवैध बिक्री के लिए जा रहे सात लोगों की गिरफ्तारी के बाद अब आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस की कार्रवाई में पकड़े गए आरोपियों में ग्राम गुल्लू स्थित शराब दुकान का सुपरवाइजर, सेल्समेन और मल्टी वर्कर शामिल हैं। इसके अलावा एक सरकारी शिक्षक सहित अन्य लोगों की गिरफ्तारी की गई है।
आरंग थाना प्रभारी नरेश साहू ने बताया कि14 सितंबर की देर रात को मुखबिर से सूचना मिली थी कि सफेद आर्टिगा कार क्रमांक CG 04 QB 5200 में ग्राम गुल्लू स्थित शराब दुकान से बड़ी मात्रा में शराब भरकर रानीसागर की ओर अवैध बिक्री के लिए ले जाई जा रही है। पुलिस टीम ने रानीसागर स्थित हनुमान मंदिर के पास घेराबंदी कर वाहन को रोका। तलाशी में कार से 160 पाव देशी मसाला शराब, कुल 28.800 बल्क लीटर, जिसकी कीमत करीब 16 हजार रुपये बताई गई, बरामद हुई। पुलिस ने शराब परिवहन में प्रयुक्त आर्टिगा कार को भी जब्त किया है। पुलिस ने सात आरोपियों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत कार्रवाई की है।
दुकान से शराब बाहर निकली तो आबकारी विभाग का निगरानी तंत्र कहां था?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पुलिस के अनुसार शराब सरकारी शराब दुकान से ही अवैध बिक्री के लिए बाहर ले जाई जा रही थी, तो दुकान की नियमित निगरानी और स्टॉक सत्यापन व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। शराब दुकान में स्टॉक का हिसाब-किताब, बिक्री और उपलब्ध शराब की मात्रा दर्ज होती है। ऐसे में दुकान के कर्मचारियों द्वारा बड़ी मात्रा में शराब कथित तौर पर अवैध बिक्री के लिए ले जाने की जानकारी संबंधित निगरानी तंत्र को क्यों नहीं हुई?
सुपरवाइजर और सेल्समेन की भूमिका से बढ़ी गंभीरता
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि गिरफ्तार आरोपियों में उसी शराब दुकान का सुपरवाइजर, सेल्समेन और मल्टी वर्कर शामिल बताए गए हैं।
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