प्रस्तावित रेत खदान के विरोध में छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने जनसुनवाई में उठाई आवाज, ग्रामीणों के साथ आंदोलन की चेतावनी
ग्राम कुरूद, तहसील आरंग, जिला रायपुर महानदी में प्रस्तावित रेत खदान के संबंध में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई में छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के सेनानियों ने भाग लेकर प्रस्तावित खदान के संभावित दुष्प्रभावों को प्रमुखता से उठाया और इसका पुरजोर विरोध किया।
आरंग । ग्राम कुरूद, तहसील आरंग, जिला रायपुर महानदी में प्रस्तावित रेत खदान के संबंध में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई में छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के सेनानियों ने भाग लेकर प्रस्तावित खदान के संभावित दुष्प्रभावों को प्रमुखता से उठाया और इसका पुरजोर विरोध किया।
जनसुनवाई में संगठन की ओर से रामेश्वर साहू (आरंग शहर अध्यक्ष), पुरुषोत्तम साहू एवं खंड संयोजक कुरूद निवासी धर्मेंद्र प्रजापति सहित अन्य सेनानियों ने उपस्थित होकर क्षेत्रवासियों की चिंताओं को प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखा।

संगठन ने कहा कि क्षेत्र में भारी रेत परिवहन वाहनों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय ग्रामीणों, विशेषकर स्कूली बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है तथा पूर्व में दुर्घटनाओं की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
जनसुनवाई में यह मुद्दा भी उठाया गया कि लगातार रेत उत्खनन से क्षेत्र के भू-जल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने के बजाय बाहरी व्यक्तियों को कार्य में रखे जाने की संभावना पर भी संगठन ने चिंता व्यक्त की।
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना के प्रतिनिधियों ने क्षेत्र में रेत कारोबार से जुड़े विवादों और पूर्व में हुई हिंसक घटनाओं का उल्लेख करते हुए प्रशासन से ग्रामीणों की सुरक्षा एवं कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

संगठन ने स्पष्ट कहा कि ग्रामीणों की सहमति, पर्यावरणीय सुरक्षा, स्थानीय लोगों के हित और बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर यदि परियोजना को अनापत्ति प्रमाण पत्र अथवा आवश्यक अनुमति प्रदान की जाती है, तो छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ग्रामवासियों के साथ मिलकर व्यापक और लोकतांत्रिक आंदोलन करेगी।
संगठन ने चेतावनी दी है कि आवश्यकता पड़ने पर आरंग एसडीएम कार्यालय से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक जोरदार आंदोलन एवं पदयात्रा की जाएगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन एवं विभाग की होगी।
छत्तीसगढ़िया क्रान्ति सेना ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि प्रस्तावित रेत खदान को अनुमति देने से पूर्व स्थानीय ग्रामीणों की आपत्तियों और पर्यावरणीय प्रभावों का गंभीरता से परीक्षण किया जाए तथा जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
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