चीनी हुई महंगी, डहरिया बोले—कहां गई ‘अच्छे दिन’ की मिठास?

आगामी तीज पर्व से पहले बाजार में चीनी के बढ़ते दामों के साथ चावल, खाद्य तेल और अन्य रोजमर्रा की जरूरत की खाद्य वस्तुओं की कीमतों को लेकर आम परिवारों की चिंता बढ़ गई है।

चीनी हुई महंगी, डहरिया बोले—कहां गई ‘अच्छे दिन’ की मिठास?

आरंग(लखौली) आगामी तीज पर्व से पहले बाजार में चीनी के बढ़ते दामों के साथ चावल, खाद्य तेल और अन्य रोजमर्रा की जरूरत की खाद्य वस्तुओं की कीमतों को लेकर आम परिवारों की चिंता बढ़ गई है। त्योहार के समय जब घरों में पकवान और पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं, ऐसे में बढ़ती महंगाई को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा तंज कसा है।डॉ. डहरिया ने कहा कि “भाजपा सरकार में अब त्योहारों की मिठास भी महंगाई की भेंट चढ़ती जा रही है। तीज का पर्व सामने है, घरों में पकवान बनने हैं, लेकिन रसोई का बजट पहले ही बिगड़ चुका है। चीनी महंगी, चावल के भाव पर दबाव और खाद्य तेल सहित अन्य जरूरी सामान की कीमतें भी आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही हैं। सरकार बताए कि जनता त्योहार मनाए या महंगाई का हिसाब लगाए?”उन्होंने कहा कि महंगाई का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम बढ़ने से महीने का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। एक ओर आमदनी सीमित है, वहीं दूसरी ओर खाद्य सामग्री के बढ़ते दाम परिवारों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं।डहरिया ने आगे कहा कि “किसान खेत में मेहनत कर अनाज पैदा करता है, लेकिन वही चावल जब बाजार में पहुंचता है तो उपभोक्ता को महंगा मिलता है। खाद्य तेल, चीनी और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने से आम आदमी की थाली लगातार महंगी होती जा रही है। सरकार को केवल महंगाई के कारण गिनाने के बजाय जनता को राहत देने के उपाय करने चाहिए।”उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से बाजार में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, जमाखोरी और कालाबाजारी पर प्रभावी कार्रवाई करने तथा कीमतों पर निगरानी बढ़ाने की मांग की। उन्होंने कहा कि त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने का फायदा उठाकर यदि कोई व्यापारी मनमाने दाम वसूलता है तो प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।डॉ. डहरिया ने कहा कि तीज छत्तीसगढ़ की सामाजिक और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। इस दौरान घरों में मिठाई, पकवान और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। ऐसे समय में चीनी, चावल, खाद्य तेल, दाल, आटा और अन्य खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ना सीधे परिवारों की जेब पर असर डालता है।उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि “सरकार के भाषणों और विज्ञापनों में भले ही विकास और अच्छे दिनों की मिठास दिखाई दे, लेकिन जनता की रसोई में महंगाई का स्वाद बढ़ता जा रहा है। सरकार को प्रचार की मिठास नहीं, बल्कि आम आदमी की थाली में राहत की मिठास लौटाने पर ध्यान देना चाहिए।”डहरिया ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार को एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बजाय महंगाई पर मिलकर काम करना चाहिए। त्योहारों के मद्देनजर खाद्य वस्तुओं की कीमतों और आपूर्ति की नियमित निगरानी हो तथा आम उपभोक्ताओं को उचित दर पर आवश्यक सामान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए।उन्होंने कहा कि “जनता ने अच्छे दिनों की उम्मीद में सरकार को चुना था। यदि तीज जैसे त्योहार में भी परिवारों को चीनी, चावल, तेल और दाल खरीदने से पहले जेब का हिसाब लगाना पड़े, तो सरकार को समझना चाहिए कि महंगाई आम आदमी के लिए कितना बड़ा संकट बन चुकी है।”डॉ. डहरिया ने कहा कि सरकार तत्काल महंगाई पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि आगामी त्योहार आम जनता के लिए खुशियों और आपसी प्रेम का अवसर बने, महंगाई की चिंता का नहीं।